जोड़-तोड़ कुछ नहीं। आप कारोबार आम भाषा में बताते हैं, Ifa उसका ढाँचा सोचकर बना देता है, और कुछ भी बनने से पहले प्लान आप जाँच लेते हैं।
काम कैसे होता है
आपका कारोबार जैसे चलता है, वर्कस्पेस वैसे ही सेट होता है।
एक वर्कफ़्लो चुनिए, वही जो सचमुच परेशान कर रहा है। उसे हम समझते हैं, बनाते हैं, और आप उसे उन्हीं लोगों के साथ चलाते हैं जो वह काम रोज़ करते हैं। आगे कुछ जोड़ने की बारी उसके बाद आती है।
मौजूदा तरीके से लेकर साथ बैठकर किए पायलट तक।
हर कदम पर कुछ ठोस आपके सामने आता है, और अगला कदम उसके बाद ही उठता है।
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एक असली वर्कफ़्लो पकड़िए
हाल का कोई अनुरोध या काम लीजिए और उसे शुरू से आख़िर तक देखिए। शुरुआत कहाँ हुई, किन-किन हाथों से गुज़रा, और किस मोड़ पर चुप्पी छा गई?
- 02
कामकाज का ढाँचा खड़ा कीजिए
वही प्रक्रिया रिकॉर्ड, चरण और व्यू बन जाती है, उन्हीं नामों से जो आपकी टीम पहले से बोलती है।
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चालू करने से पहले जाँच लीजिए
सुझाया गया वर्कस्पेस आप देखते हैं और हमसे जो ग़लत हुआ, उसे सुधार देते हैं। जब तक आप न कहें, कुछ भी पूरा नहीं माना जाता।
- 04
पहला वर्कफ़्लो आज़माइए
एक ही प्रक्रिया, और वही लोग जो उसे रोज़ चलाते हैं। दायरा इतना छोटा कि फ़ायदा हुआ या नहीं, यह साफ़ दिख जाए।
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रोज़ के काम में चलाइए
नया, इंतज़ार में, किसी के नाम, चालू, देर से चल रहा। सब कुछ वहीं, जहाँ आपने काम किया।
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इस्तेमाल से सुधारिए
पायलट ने जो ग़लत निकाला, उसे बदलिए। दूसरा वर्कफ़्लो तभी जोड़िए जब पहला अपनी जगह बना ले।
“साथ बैठकर” का मतलब
सिस्टम का ढाँचा अकेले आपकी टीम को नहीं सोचना पड़ेगा।
लॉन्च से पहले चुने हुए कारोबार पहला वर्कफ़्लो सीधे हमारे साथ बैठकर तय करते हैं। सेटअप हम करते हैं, और कहाँ ग़लत हुआ यह आप बताते हैं।
- नाम आपके कारोबार से लिए जाते हैं, किसी टेम्पलेट से नहीं
- हर अहम चरण पर ज़िम्मेदार भी दिखता है और अगला कदम भी
- नमूने की झलकें आपके असली सबूत से साफ़ अलग रखी जाती हैं
- पूरी कंपनी को एक साथ बदलने के बजाय एक छोटा पायलट
- तय हुए वर्कफ़्लो की आज़माइश के दौरान सीधी मदद
आगे और देखिए
अपने अगले सवाल के हिसाब से चुनिए।
उस वर्कफ़्लो से शुरू कीजिए, जिसमें सबसे ज़्यादा उलझन रहती है।
प्रतीक्षा सूची में नाम लिखवाइए और बताइए कि कौन-सा हैंडओवर बार-बार चुप पड़ जाता है।